2-175 राम दरिया भाजा पुणे महाराष्ट्र
राम दरिया राम द्वार का अपभ्रंश है। यहाँ पहाड़ की दो चोटियाँ इस प्रकार निकट हैं कि द्वार जैसा लगता है। माना जाता है कि श्रीराम इसी मार्ग से मुंबई से पूना की ओर गये थे।
Read moreराम दरिया राम द्वार का अपभ्रंश है। यहाँ पहाड़ की दो चोटियाँ इस प्रकार निकट हैं कि द्वार जैसा लगता है। माना जाता है कि श्रीराम इसी मार्ग से मुंबई से पूना की ओर गये थे।
Read moreलोक कथा के अनुसार श्रीराम ने लंका अभियान के समय घोड़ नदी के किनारे रूर नामक राक्षस का वध किया था। राक्षस का सिर यहाँ गिरा था इसलिए यह स्थल सिररूर था जो शिरूर हो गया है।
Read moreलोक कथा के अनुसार श्रीराम यहाँ ऋषि पंडित आचार्य से मिलने आये थे। ऋषि संस्कृत विद्यालय चलाते थे। यहाँ श्रीराम ने शिव पूजा की थी इसीलिए मंदिर का नाम रामेश्वर है। वा.रा. 3/69/1 से 9 मानस 3/32/2 रामेश्वर से रामकुण्डः- कंुथलगिरि- सौताड़ा-रामकुण्ड-वासी-भूम। 24 कि.मी. नोट: सुविधा की दृष्टि से यात्री पहले कंुथल गिरि जायें तथा […]
Read moreभूम से 13 कि.मी. दूर रामकुण्ड नामक गाँव है। माना जाता है कि यहाँ श्रीराम ने स्नान किया था। संभवतः यहाँ श्रीराम दो बार आये हैं। वा.रा. 3/69/1 से 9 मानस 3/32/2
Read moreदण्डकारण्य में घूमते हुए श्रीराम ने यहाँ जैन मुनि देशभूषण तथा मुनि कुलभूषण की एक राक्षस से रक्षा की थी तभी उन्होंने यहाँ एक जिनालय की स्थापना की थी। वा.रा. 3/69/1 से 9 मानस 3/32/2 कंुथलगिरि से येडेश्वरीः- रामकुण्ड -वार्सी-एरमला। राष्ट्रीय राजमार्ग 211 से 35 कि.मी. वा.रा. 3/69/1 से 9 मानस 3/32/2
Read moreयेडेष्वरी एरमला सती माँ ने श्रीराम की परीक्षा लेते समय काफी लम्बी दूरी तक उनके आगे-आगे यात्रा की थी तभी श्रीराम ने सती माँ को ‘येडई माँ’ कहकर पुकारा था। एरमला में इसी नाम से उनका मंदिर है। यहाँ श्रीराम और सती माँ की भेंट हुई थी। मानस 1/47/1 से 1/55/4 तक येडेश्वरी से येडसीः- […]
Read moreरामलिंग येडसी श्रीराम किसी भी स्थिति में भगवान शिव की पूजा अवश्य करते थे। उस्मानाबाद जिले में येडसी के निकट घने जंगल में उन्होंने शिवलिंग की स्थापना की थी। इसीलिए इस मंदिर का नाम रामलिंग है।
Read moreतुलजापुर में सती माँ ने श्रीराम की परीक्षा लेने के बाद श्रीराम को सीतान्वेषण में सफल होने का वरदान दिया तभी नाम श्रीराम वरदायिनी हुआ है। मानस 1/47/1 से 1/55/4 तक नोटः श्रीराम वरदायिनी तथा घाट शिला मंदिर दोनों ही तुलजापुर में है। अतः उसका मार्ग बनाने की आवश्यकता नहीं है।
Read moreतुलजापुर में माँ सती ने श्रीराम को एक शिला पर अपने वास्तविक स्वरूप के दर्शन दिये तथा दक्षिण दिशा में सीतान्वेषण का संकेत किया। जिस शिला पर उन्होंने श्रीराम को दर्शन दिये वह आज घाटशिला मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है।
Read moreनलदुर्ग से 3 कि.मी. दूर बोरी नदी के किनारे एक पहाड़ी पर श्रीराम लक्ष्मण जी तथा सीता जी के खेत बताए जाते हैं। इन्हें डोह कहते हैं। श्रीराम के सानिध्य का इस स्थल को दो बार सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
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