Friday, April 4, 2025

2-161 कुशावृत तीर्थ त्र्यम्बकेश्वर महाराष्ट्र

नासिक से 28 कि.मी. पश्चिम दिशा में गोदावरी के उद्गम स्थल के पास श्रीराम ने कुशों से दशरथ जी का श्राद्ध किया था। इसलिए इस क्षेत्र का नाम कुशावृत तीर्थ है।  वा.रा. 3/16/6 मानस 3/13/1 से 3/16/1 तक

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2-162 रामकुण्ड त्र्यंबकेश्वर महाराष्ट्र

गोदावरी के उद्गम स्थल गोमुख से कुछ आगे चलकर माँ गोदावरी पुनः लुप्त हो गयी थी। लोकमान्यता के अनुसार यहाँ श्रीराम ने बाण द्वारा पुनः माँ गोदावरी को प्रकट किया था। जिस स्थान पर बाण चलाया गया वहाँ अब ये जल एक कुण्ड के रूप विराजमान है । वा.रा. 3/16/2, 3 मानस 3/13/1 से 3/16/1 […]

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2-163 सिद्धेश्वर प्रवरा संगम अ नगर महाराष्ट्र

सिद्धेश्वर प्रवरा संगम पर ये तीर्थ है । लोक विश्वास के अनुसार हरिण रूपी मारीच श्रीराम से डरकर यहाँ छुप गया था। शिव कृपा से श्रीराम को मारीच को ढूँढने में सिद्धता प्राप्त हुई थी। इसलिए यहाँ सिद्धेश्वर मंदिर की स्थापना हुई।

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2-164 ठाण नासिक महाराष्ट्र

महाराष्ट्र के नासिक जिले में एक क्षेत्र विशेष में ठाण नाम के कई गाँव हैं। इसके पीछे लोक मान्यता ये है कि हिरण रूपी मारीच जंगल में पेड़ों और झाड़ियों के पीछे जान बचाने के लिये छिपता रहा । उसकी मृत्यु से पूर्व रामजी ने अनेक स्थानों पर खडे़ होकर निशाना साधा था किन्तु तीर […]

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2-165 बाणेश्वर मंदिर कोठरे नेफाड नासिक महाराष्ट्र

कोठरे नेफाड से 10 कि मी. पूर्व दिशा में गोदावरी के किनारे बाणेश्वर मंदिर है। लोक कथा के अनुसार यहाँ खड़े होकर श्री राम ने मारीच को बाण मारा था। वा.रा. 3/44/1 से 3/ 44/ 22, मानस 3/26/6 से 3/27/1 तक नोटः- बाणेष्वर कोठुरे तथा बाणेष्वर, नांदूर, मृगव्याधेेश्वर, मध्यमेश्वर पास-पास में ही हैं।

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2-166 बाणेश्वर नांदूर नासिक महाराष्ट्र

नांदूर मध्यमेश्वर में गोदावरी के किनारे बाणेश्वर मंदिर है। लोक कथा के अनुसार यहाँ खडे़ होकर श्रीराम ने मारीच को मारा था।

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2-167 मृग व्याधेश्वर नासिक महाराष्ट्र

लोक मान्यता के अनुसार यहाँ मारीच को बाण लगा था और उसके टुकडे़-टुकडे़ हो गये थे। यह स्थल नेफाड़ से 12 कि.मी. पूर्व दिशा में है। वा.रा. 3/44/1 से 3/44/22 तक मानस 3/26/6 से 3/27/1 तक

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2-168 मध्यमेश्वर नांदूर नासिक महाराष्ट्र

मध्यमेष्वर नांदूर मारीच ने बाण लगने के बाद श्रीराम की आवाज की नकल करते हुए लक्ष्मणजी से सहायता की गुहार की थी। सीता मां कीप्रेरणा से लक्ष्मण जी श्रीराम से मिलने गए तब मध्यमेश्वर में श्रीराम एवं लक्ष्मण जी की भेंट हुई थी।

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2-169 रामेश्वर खाण्ड गांव नासिक महाराष्ट्र

एक लोक कथा के अनुसार जब श्रीराम ने मारीच को बाण मारा तो उसके टुकड़े-टुकडे़ हो गये। उसका धड़ काय गांव में गिरा और सिर टोक गाँव में गिरा। मराठी में टोक अर्थात् मुण्डी। यहाँ भी श्रीराम द्वारा स्थापित शिव मंदिर है। वा.रा. 3/44/1 से 3/44/22 तक बाणेश्वर नांदूर मानस 3/26/6 से 3/27/1 तक।

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2-170 रामेश्वर मंदिर कायगांव नासिक महाराष्ट्र

गोदावरी के किनारे गंगापुर तालुका में श्रीराम द्वारा स्थापित भगवान शिव का रामेश्वर मंदिर है। लोकमान्यता के अनुसार श्रीराम के बाण से मृत मारीच का धड़ (काया) यहाँ गिरा था। वा.रा. 3/44/1 से 3/44/22 तक मानस 3/26/6 से 3/27/1 तक। नोटः- घटेश्वर, मुक्तेश्वर आस-पास ही हैं।

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