2-161 कुशावृत तीर्थ त्र्यम्बकेश्वर महाराष्ट्र
नासिक से 28 कि.मी. पश्चिम दिशा में गोदावरी के उद्गम स्थल के पास श्रीराम ने कुशों से दशरथ जी का श्राद्ध किया था। इसलिए इस क्षेत्र का नाम कुशावृत तीर्थ है। वा.रा. 3/16/6 मानस 3/13/1 से 3/16/1 तक
Read moreनासिक से 28 कि.मी. पश्चिम दिशा में गोदावरी के उद्गम स्थल के पास श्रीराम ने कुशों से दशरथ जी का श्राद्ध किया था। इसलिए इस क्षेत्र का नाम कुशावृत तीर्थ है। वा.रा. 3/16/6 मानस 3/13/1 से 3/16/1 तक
Read moreगोदावरी के उद्गम स्थल गोमुख से कुछ आगे चलकर माँ गोदावरी पुनः लुप्त हो गयी थी। लोकमान्यता के अनुसार यहाँ श्रीराम ने बाण द्वारा पुनः माँ गोदावरी को प्रकट किया था। जिस स्थान पर बाण चलाया गया वहाँ अब ये जल एक कुण्ड के रूप विराजमान है । वा.रा. 3/16/2, 3 मानस 3/13/1 से 3/16/1 […]
Read moreसिद्धेश्वर प्रवरा संगम पर ये तीर्थ है । लोक विश्वास के अनुसार हरिण रूपी मारीच श्रीराम से डरकर यहाँ छुप गया था। शिव कृपा से श्रीराम को मारीच को ढूँढने में सिद्धता प्राप्त हुई थी। इसलिए यहाँ सिद्धेश्वर मंदिर की स्थापना हुई।
Read moreमहाराष्ट्र के नासिक जिले में एक क्षेत्र विशेष में ठाण नाम के कई गाँव हैं। इसके पीछे लोक मान्यता ये है कि हिरण रूपी मारीच जंगल में पेड़ों और झाड़ियों के पीछे जान बचाने के लिये छिपता रहा । उसकी मृत्यु से पूर्व रामजी ने अनेक स्थानों पर खडे़ होकर निशाना साधा था किन्तु तीर […]
Read moreकोठरे नेफाड से 10 कि मी. पूर्व दिशा में गोदावरी के किनारे बाणेश्वर मंदिर है। लोक कथा के अनुसार यहाँ खड़े होकर श्री राम ने मारीच को बाण मारा था। वा.रा. 3/44/1 से 3/ 44/ 22, मानस 3/26/6 से 3/27/1 तक नोटः- बाणेष्वर कोठुरे तथा बाणेष्वर, नांदूर, मृगव्याधेेश्वर, मध्यमेश्वर पास-पास में ही हैं।
Read moreनांदूर मध्यमेश्वर में गोदावरी के किनारे बाणेश्वर मंदिर है। लोक कथा के अनुसार यहाँ खडे़ होकर श्रीराम ने मारीच को मारा था।
Read moreलोक मान्यता के अनुसार यहाँ मारीच को बाण लगा था और उसके टुकडे़-टुकडे़ हो गये थे। यह स्थल नेफाड़ से 12 कि.मी. पूर्व दिशा में है। वा.रा. 3/44/1 से 3/44/22 तक मानस 3/26/6 से 3/27/1 तक
Read moreमध्यमेष्वर नांदूर मारीच ने बाण लगने के बाद श्रीराम की आवाज की नकल करते हुए लक्ष्मणजी से सहायता की गुहार की थी। सीता मां कीप्रेरणा से लक्ष्मण जी श्रीराम से मिलने गए तब मध्यमेश्वर में श्रीराम एवं लक्ष्मण जी की भेंट हुई थी।
Read moreएक लोक कथा के अनुसार जब श्रीराम ने मारीच को बाण मारा तो उसके टुकड़े-टुकडे़ हो गये। उसका धड़ काय गांव में गिरा और सिर टोक गाँव में गिरा। मराठी में टोक अर्थात् मुण्डी। यहाँ भी श्रीराम द्वारा स्थापित शिव मंदिर है। वा.रा. 3/44/1 से 3/44/22 तक बाणेश्वर नांदूर मानस 3/26/6 से 3/27/1 तक।
Read moreगोदावरी के किनारे गंगापुर तालुका में श्रीराम द्वारा स्थापित भगवान शिव का रामेश्वर मंदिर है। लोकमान्यता के अनुसार श्रीराम के बाण से मृत मारीच का धड़ (काया) यहाँ गिरा था। वा.रा. 3/44/1 से 3/44/22 तक मानस 3/26/6 से 3/27/1 तक। नोटः- घटेश्वर, मुक्तेश्वर आस-पास ही हैं।
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