2-181 रामलिंग येडसी उस्मानाबाद महाराष्ट्र
रामलिंग येडसी श्रीराम किसी भी स्थिति में भगवान शिव की पूजा अवश्य करते थे। उस्मानाबाद जिले में येडसी के निकट घने जंगल में उन्होंने शिवलिंग की स्थापना की थी। इसीलिए इस मंदिर का नाम रामलिंग है।
Read moreरामलिंग येडसी श्रीराम किसी भी स्थिति में भगवान शिव की पूजा अवश्य करते थे। उस्मानाबाद जिले में येडसी के निकट घने जंगल में उन्होंने शिवलिंग की स्थापना की थी। इसीलिए इस मंदिर का नाम रामलिंग है।
Read moreतुलजापुर में सती माँ ने श्रीराम की परीक्षा लेने के बाद श्रीराम को सीतान्वेषण में सफल होने का वरदान दिया तभी नाम श्रीराम वरदायिनी हुआ है। मानस 1/47/1 से 1/55/4 तक नोटः श्रीराम वरदायिनी तथा घाट शिला मंदिर दोनों ही तुलजापुर में है। अतः उसका मार्ग बनाने की आवश्यकता नहीं है।
Read moreतुलजापुर में माँ सती ने श्रीराम को एक शिला पर अपने वास्तविक स्वरूप के दर्शन दिये तथा दक्षिण दिशा में सीतान्वेषण का संकेत किया। जिस शिला पर उन्होंने श्रीराम को दर्शन दिये वह आज घाटशिला मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है।
Read moreनलदुर्ग से 3 कि.मी. दूर बोरी नदी के किनारे एक पहाड़ी पर श्रीराम लक्ष्मण जी तथा सीता जी के खेत बताए जाते हैं। इन्हें डोह कहते हैं। श्रीराम के सानिध्य का इस स्थल को दो बार सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
Read moreलोक मान्यता के अनुसार श्रीराम तुलजापुर से बोरी नदी के किनारे-किनारे आये थे। यह नदी बाद में भीमा नदी में मिलती है। किनीगाँव के निकट उन्होंने नदी में स्नान किया था। अब यहाँ एक छोटा सा श्रीराम मंदिर बना है।
Read moreसती माँ द्वारा परीक्षा लेने के बाद उनके संकेत पर श्रीराम दक्षिण दिशा में सिंडगी के उत्तर की ओर 20 कि.मी. आये थे और उन्होंने यहाँ भगवान शिव की पूजा की थी। इसलिए मंदिर का नाम रामलिंग है।
Read moreरामतीर्थ अथणी तालुका में रामतीर्थ गाँव में रामजी से पूजा करवाने शिव सपरिवार यहाँ पधारेे थे। श्रीराम के आग्रह पर शिवजी ने शिवलिंग का अलंकरण, नाम रामेश्वर, गर्मजल से जलाभिषेक तथा केतकी के फूलों से पूजा स्वीकार की।
Read more188. रामतीर्थ, जमखंडी अथणी से 60 कि.मी. दक्षिण दिशा में जमखण्डी में भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है। श्रीराम ने यहाँ शिव पूजा की थी। वा. रा. 3/69/1 से 9 तक मानस 3/32/2 रामतीर्थ जमखण्डी से कबन्ध आश्रमः- जमखण्डी-मुधोल-लोकापुर-मुदकवी- करड़ीगुड। एस. एच.-34 से 72 कि.मी.। 189. अयोमुखी गुफा रामदुर्ग से 16 कि.मी. दूर एक पहाड़ी […]
Read moreअयोमुखी गुफा रामदुर्ग से 16 कि.मी. दूर एक पहाड़ी पर राक्षसी की गुफा है। उसने भोग विलास की कामना से लक्ष्मणजी को पकड़ लिया तथा लक्ष्मणजी ने उसके नाक, कान काट डाले थे।
Read moreरामदुर्ग करड़ी गुड्ड (रीछों का पहाड़) नामक गाँव के पास पहाड़ी पर एक टेढे़-मेढे़ पत्थर की मूर्ति रखी है। यह मूर्ति वाल्मीकि रामायण में वर्णित कबंध के शरीर से मेल खाती है। स्थानीय लोग इसको राक्षस का मंदिर कहते हैं, जिसका श्रीराम ने संहार किया था।
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