Friday, April 4, 2025

2-42 विराध कुण्ड

अमरावती से 3 कि.मी. दूर घनघोर जंगल में एक भयंकर कुण्ड है। इस कुण्ड में झांकने पर भी डर लगता है। यहाँ विराध दफनाया गया था। वा.रा. 3/2, 3, 4 पूरे अध्याय, मानस 3/6/3, 4

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2-43 पुष्करणी टिकरिया

श्रीराम, लक्ष्मण का विराध से लम्बा संघर्ष चला था और विराध वध में दोनों के हथियार तथा वस्त्र भी खून से सन गए थे। टिकरिया तथा मारकुंडी के बीच एक विशाल पुष्करणी में उन्होंने अपने हथियार तथा वस्त्र धोये थे। वा.रा. 3/4/5 से 12 परिस्थितिजन्य। पुष्करिणी से मारकण्डेय आश्रमः- टिकरिया-जमुनिहाई-मारकण्डेय आश्रम। 12 कि.मी

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2-44 मार्कण्डेय आश्रम

मारकुण्डी स्टेशन से एक कि.मी. दूर मार्कण्डेय आश्रम है। मारकुंडी मारकण्डेय का अपभ्रश है। यहाँ भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है। माना जाता है कि पुष्करणी में स्नान के बाद श्रीराम ने यहाँ शिव पूजा की थी। वा.रा. 2/116/1 से 26, मानस 2/285/4 मारकण्डेय आश्रम से अश्वमुनि/ शरभंग आश्रमः-  मारकुण्डी-मझगवां- परेवा-चितहरा-नौगवां-शरभंग आश्रम- अश्वमुनि। एम.पी.एस.एच.-11 से […]

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1-39 डेरवां गोरखपुर उत्तर प्रदेश

श्रीराम की बारात का तीसरा विश्राम स्थल श्रीराम जानकी मार्ग पर डेरवा गाँव है। चूँकि बारात ने यहाँ डेरा डाला था, इसीलिए गाँव का नाम आज भी डेरवा है।

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1-40 दोहरी घाट मऊ उत्तर प्रदेश

दो हरी, का अपभ्रंश है दोहरी। श्रीराम तथा परशुराम जी दोनों ही विष्णु के अवतार हुए हैं। दोनों की यहाँ सरयूजी के किनारे भेंट हुई थी इसीलिए स्थल का नाम दोहरी घाट है। वाल्मीकि जी के अनुसार परशुराम जी से भेंट के बाद, बारात अयोध्या पहुंची थी। वा.रा. 1/74/18 से 1/76 पूरे अध्याय। दोहरी घाट […]

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1-41 श्री राम जानकी मार्ग बिहार – उत्तर प्रदेश

प्राचीन परम्परा से अयोध्याजी से पूर्व दिशा में एक कच्चे मार्ग को राम जानकी मार्ग कहा जाता रहा है। अब यह पक्की सड़क बन गयी है तथा इसका नाम श्रीराम जानकी मार्ग ही है। लोकमान्यता के अनुसार बारात के साथ श्री सीताराम जी का रथ इसी मार्ग से आया था।

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1-3 श्रृंगी ऋषि आश्रम शेरवा घाट

ये है श्रृंगी ऋषि आश्रम । उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले में अयोध्याजी से कुछ दूरी पर शेरवा घाट में अवस्थित ये आश्रम ऐतिहासिक महत्व का है । रामायण ग्रंथ का पारायण करने वाले हम सभी जानते हैं कि त्रेता युग में अयोध्याजी से कुछ दूर चलने के बाद अगले प्रातःकाल मुनि विश्वामित्र ने राम […]

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1-1-1 दशरथ जी का महल अयोध्या फैजाबाद उत्तर प्रदेश

हम सभी जानते हैं कि अयोध्याजी श्रीराम की जन्मभूमि है। वर्तमान काल में बड़ा स्थान के रूप में विख्यात मंदिर स्थल पर प्राचीन काल में अयोध्या के प्रतापी सम्राट दशरथ जी का महल था । यहीं श्री रामजी सहित चारों भाइयों की बाल्यावस्था बीती । श्रीराम ने यहीं से वन की यात्रा आरम्भ की थी। […]

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2-234 भादर्शा अयोध्या जी नन्दी ग्राम

अयोध्या जी नन्दी ग्राम के पास भादर्शा नामक एक  बाजार है। भादर्शा का अर्थ है-भये दर्शन। अयोध्यावासियों को श्रीराम के पुष्पक विमान में दर्शन हुए थे। वा.रा. 6/127/30 से 39, मानस 7/4 दोहा 7/4 ख दोहा।

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2-235 रामकुण्ड पुहपी

रामकुण्ड अयोध्या जी में विमान जहाँ उतरा वहाँ पुष्पक विमान की स्मृति में पुष्पकपुरी बसाई गयी थी। कालान्तर में उसी का अपभ्रंश हो गया पुहपी। पुहपी गाँव के पास ही रामकुण्ड नामक एक विशाल सरोवर श्रीराम के यहाँ पदार्पण का आज भी स्मरण कराता है। व.रा. 6/127/30 से 35 मानस 7/4क दोहा

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